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8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के करेंसी नोट बंद किए। उसके बाद से अब तक ना जाने कितनी बार तथा बार-बार तरह-तरह की घोषनाएं करते रहे। उन्होंने बार-बार नीतियों को बदलने को लेकर नीतियों को पंसारी की दुकान बना डाला। दरअसल में मोदी जी आपको चाहिए था कि ऐसी घोषणा करने से पहले उस पर विशेष मंथन कर लेते क्योंकि बिना मंथन किए हाय तोबा में करंसी नोट बंद तो कर दिए लेकिन इतने बड़े विशाल जनसंख्या वाले देश में क्या-क्या दिक्कतें खड़ी हो जाएगी, इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। परिणाम क्या हुआ, चारों ओर देश में अफरा-तफरी का वातावरण बन गया और अब तक भी देश की जनता परेशान है।

काले धन को निकालने का खेल दिखाकर देश का ध्यान कैशलेस पद्धति की ओर मोड़ दिया। एक बात पर, एक नीति पर व  एक घोषणा पर अडिग नहीं रहे। ऐसी बातें प्रधानमंत्री के लिए शोभनीय नहीं है तथा उनके राजनीतिक भविष्य के लिए स्वास्थ्यवर्धक भी नहीं है। दरअसल में करेंसी नोट बंद करने के बाद प्रधानमंत्री खुद ही असमंजस की स्थिति में आ गए। इसी के कारण हाय तोबा में बार बार अलग-अलग घोषनाएं करते ही चले गए। अगर नोट बंदी से पहले अपने विशेष सलाहकारों के साथ मिलकर पूरी व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रख लेते तो ऐसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न ही ना होती, लेकिन इस बारे में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक व अन्य आर्थिक मामलों के सलाहकारों से सलाह मशवरा शुद्ध गंभीरता के साथ नहीं किया गया।

मोदी जी इस देश की आबादी सवा सौ करोड़ की है और आज भी इस देश की लगभग 70% आबादी ग्रामीण आबादी है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों को इस नोट बंदी का इतना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा कि उनके पास भोजन खाने तक के लाले पड़ गए। लोग पाई-पाई को मोहताज हो गए। माना कि आपने अपनी सोच के अनुसार अच्छा काम किया लेकिन आपने अपनी सोच में इस देश के इतने बड़े आकार को बिल्कुल ही सामने नहीं रखा। कभी आपने कहा कि मुझे 7 दिन दे दो, कभी आपने कहा कि मुझे इतने दिन दे दो, कभी आपने कहा कि मुझे 50 दिन दे दो। मोदी जी 50 दिन तो क्या जनता आपको सौ दिन भी देने को तैयार थी व तैयार है, लेकिन बार-बार सरकार द्वारा गिरगिट की तरह नीतियां बदलना व विचार बदलना व घोषणाएं करना पंसारी की दुकान का रुप ले चुकी है। पंसारी की दुकान पर मोलभाव होते शोभा देते हैं, लेकिन आप जैसे बार-बार मोलभाव बदले यह बात तनिक भी शोभनीय नहीं है।

आपने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से साधारण से साधारण नागरिक को भी डराने धमकाने में कोर-कसर नहीं छोड़ी। जैसे पहले बोल दिया था कि  अढाई लाख रुपए बैंक में जमा कराने वालों से सरकार कुछ भी पूछताछ नहीं करेगी, लेकिन कुछ समय के बाद आप ने यह कह दिया कि मैं 49000 वालों को भी नहीं छोडूंगा। अब आपकी सरकार लोगों को यह कह रही है कि जनता को यह भी बताना पड़ेगा कि वह अढाई लाख रुपए कहां से लाई। इसी तरह की कई तरह की बातों को लेकर आपने देश के गरीब से गरीब नागरिक को भी चमकाने व डराने में अपनी जुबां पर कंट्रोल नहीं रखा।

बेहतर होता कि आप अपने विशेष सलाहकारों के साथ सलाह मशवरा करके एक विशेष स्पष्ट जानकारी देश की जनता के समक्ष रखते, ताकि आपकी इतनी थू-थू ना होती। अभी भी वक्त है कि अपनी नीतियों पर अडिग रहें, अन्यथा इन सब का खामियाजा देश के साथ साथ आप को व आपकी भाजपा सरकार को भविष्य में अवश्य भुगतना पड़ेगा। जिस ढंग से देश की जनता आप के समर्थन में आज भी खड़ी है तथा आज भी आपमें सुखद भारत का स्वप्न देख रही है, तो ऐसे में आप भी अपनी कसौटी पर खरे उतरें।

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