Story of the free school for girls Vimukti school jaipur

क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है. लेकिन अब भी इसे महिला अधिकारों और लड़कियों की आज़ादी के लिए सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है. वर्ष 2011 जनगणना के अनुसार यहां लड़कियों की साक्षारता दर सिर्फ 52.1 प्रतिशत है. यानी राजस्थान में आधी लड़कियों को तो पढ़ाई-लिखाई ही नसीब नहीं हो पाती. इसके अलावा यह बालविवाह जैसी प्रथाओं के लिए भी कुख्यात रहा हैं. लोग अभी भी लड़कियों को लड़कों से कमतर मानते हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई को कोई अहमियत नहीं देते.

इस तरह के माहौल में गरीब लड़कियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लवलीना सोगानी ने एक अनूठी पहल की है. उन्होंने एक ऐसा स्कूल खोल डाला जहां एक साथ 600 लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है. जब उनसे यह पूछा गया कि यह प्रेरणा उन्हें कहाँ से आई तो सोगानी से जवाब दिया “ एक दिन संगीता नाम की एक बच्ची ने उनसे एक सवाल किया जिसे सुनकर वो अवाक रह गईं? वो कौन-सी बात थी जिसने लवलीना को समाज के एक ऐसे तबके से रू-ब-रू करवाया, जिसके बारे में सुनकर उनकी आंखें छलक गईं?” आखिर ऐसी क्या बात कह दी थी एक छोटी सी बच्ची ने? यदि आप भी सोगानी की जगह होती तो आपका मन भी इसको सुनकर एक बार पसीज जाता.

संगीता लवलीना सोगानी की सोसाइटी के गार्ड की 14 साल की बेटी हैं. संगीता हमेशा लवलीना की बच्ची के साथ खेलने के लिए आती थी. वह उनकी बेटी के साथ खेलती थी, परन्तु हमेशा एक दूरी बनाकर रखती थी. अगर घर में बच्चों के लिए कुछ खाने को दिया जाता तो वह बिना कहे कुछ नहीं छूती थी. यह सब बातें लवलीना के मन के घर कर गयी वह सोचने लग गयी की शायद परिस्थितियों ने उसे ऐसा बना दिया था.’

एक वाकिये को बताते हुए लवलीना कहती हैं कि ‘एक बार मैं बच्चों के लिए एक गिलास दूध के साथ बिस्किट लेकर आई. संगीता भी दूर से खड़े-खड़े देख रही थी. मैंने देखा कि संगीता गुमसुम सी गिलास की ओर एकटक देखे ही जा रही थी. उसके बाद उसने अचानक से अपनी नजरें दूसरी ओर कर लीं. शायद वह अपना ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही थी. ये सब देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए और मैं किचन में जाकर उसके लिए एक गिलास दूध लेकर आई और उसे दिया. दूध पीने के बाद संगीता ने लवलीना को जो बताया उससे दिल भर आया. संगीता ने बताया कि “लड़कियां दूध नहीं पीतीं, दूध तो सिर्फ मेरे भैया के लिए होता है.” संगीता दो बहनें थीं, लेकिन सिर्फ उसके भाई को ही स्कूल भेजा जाता था. संगीता की यह बात सुनकर लवलीना हतप्रभ रह गईं. जब उन्हें पता चला कि समाज का एक ऐसा भी तबका है जहां लड़कियों की परवरिश इतनी बुरी हालत में होती है तो फिर उन्होंने एक स्कूल खोलने का इरादा कर लिया. शुरुआत में थोड़ी सी जगह में दो-तीन मेज के साथ विमुक्ति गर्ल्स स्कूल की शुरुआत की. आज उनके इस स्कूल में तकरीबन 600 लड़कियां पढ़ती हैं और ये संख्या साल दर साल बढ़ती ही चली जा रही है.

विमुक्ति स्कूल में आज केजी से आठवीं कक्षा तक हो गया हैं इसके अलावा लड़कियों को इंग्लिश सिखाने पर भी जोर दिया जाता है, ताकि वे कहीं भी बेधड़क अंग्रेजी में बात कर सकें. हर साल लवलीना अपनी टीम के साथ पिछड़े इलाकों में जाती हैं और वहां लोगों को बेटियों को पढ़ाने के बारे में जागरुक करती हैं. मां-बाप को भी जब ये अहसास होता है कि पढ़-लिख कर उनकी बेटी कुछ बन जायेगी, तो वे और उत्साहित होकर लड़कियों को स्कूल भेजते हैं.

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