भारत एक बार फिर पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर सकता है. इसके पहले भारत सितंबर 2016 में ऐसा कर चुका है और तब सार्क सम्मेलन रद्द करना पड़ा था. ऐसा हुआ तो लगातार तीसरे साल सार्क सम्मेलन का आयोजन नहीं हो पाएगा.

गौरतलब है कि 20वें दक्ष‍िण एशि‍याई क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC) सम्मेलन का आयोजन पाकिस्तान में हो रहा है. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अभी भी अपनी जमीन पर पनपने वाले आतंकवाद पर काबू के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं. एक सूत्र ने कहा, ‘जब तक पाकिस्तान से आने वाला आतंकवाद जारी रहता है, भारत के सार्क सम्मेलन में शामिल होने के लिए माहौल उपयुक्त नहीं रहेगा.’

19वें सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन साल 2016 में पाकिस्तान में किया जाना था, लेकिन भारत समेत बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने इस समिट में हिस्सा नहीं लिया था. बांग्लादेश घरेलू परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ था, जिसके बाद ये सम्मेलन रद्द करना पड़ा था.

पाकिस्तान इस बार सभी सदस्य देशों को मनाने की कोशिश कर रहा है. उसे डर है कि सितंबर, 2016 की तरह इस बार भी कहीं सदस्य देश इसमें शिकरत की योजना कैंसिल न कर दें और सम्मेलन को रद्द न करना पड़े. पिछले दो साल से पाकिस्तान इसका आयोजन नहीं कर पा रहा है. इसकी वजह से उस पर इस बात का काफी दबाव है कि सम्मेलन को सफल तरीक से आयोजित किया जाए.

सार्क के फिलहाल आठ देश सदस्य हैं-अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, मालदीव, पाकिस्तान और श्रीलंका. जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को आतंकी हमले के बाद भारत ने साल 2016 में इस सम्मेलन में शामिल न होने का निर्णय लिया था. आखिरी सार्क शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में आयोजित किया गया था.

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