नई दिल्ली: गर्भवती (Pregnancy) महिलाओं में समय से पहले होने वाली प्रसव-पीड़ा (प्रेग्नेंसी के दौरान दर्द) के लिए गर्भस्थ शिशु की प्रतिरोधी क्षमता में विकास एक वजह हो सकती है. यह बात हाल ही में हुए एक शोध के नतीजों से पता चली. कई ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जब गर्भ की मेच्योर होने के 37वें हफ्ते से पहले गर्भवती महिलाओं को तकलीफ बढ़ जाती है, जिस कारण समय से पहले डिलीवरी हो जाती है.

शोध के नतीजों में पाया गया कि कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि भ्रूण की प्रतिरोधी क्षमता जाग्रत हो जाने से बच्चा मां के गर्भ में रहना स्वीकार करना बंद कर देता है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन पैदा होता है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, भ्रूण की प्रतिरोधी क्षमता के कारण गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव-पीड़ा होने लगती है.

उनका कहना है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी कोशिकाएं माता की कोशिकाओं को लेकर उलझन में रहती हैं और माता की कोशिकाओं से खतरा महसूस करती हैं, जोकि सूजन या जलन पैदा करने वाले रसायन के रूप में उत्पन्न होता है.

सैन फ्रैंसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर तिप्पी मैकेंजी ने कहा, “एक धारणा है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी क्षमता बहुत कमजोर होती है और इसके परिणामस्वरूप लोग गर्भावस्था में इसकी संभावित भूमिका को नहीं समझ पाते हैं.”

उन्होंने कहा, “हमने दिखाया कि समय से पहले प्रसव-पीड़ा का अनुभव करने वाली महिला मरीजों में संक्रमण व सूजन की शिकायत होती है, जिसका कारण यह है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी क्षमता जाग्रत हो जाती है.”

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source NDTV india