मुंबई। वीडियोकॉन ग्रुप को दिए कर्ज मामले में फंसी आइसीआइसीआइ बैंक की एमडी व सीईओ चंदा कोचर पर आखिरकार खुद बैंक द्वारा जांच की तलवार गिरी है। मामला सामने आने के बाद से ही कोचर के समर्थन में खड़े बैंक के निदेशक बोर्ड ने एक गुमनाम शिकायतकर्ता की शिकायत पर उनकेखिलाफ स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि आरोपों का विस्तृृत ब्योरा दिए बगैर बैंक ने कहा कि जांच कमेटी का प्रमुख एक स्वतंत्र व विश्वसनीय व्यक्ति को बनाया जाएगा।

नियामक को दी जानकारी में बुधवार को बैंक ने कहा कि मंगलवार को बोर्ड की बैठक में जांच का फैसला लिया गया। बैंक ने कहा कि जांच का दायरा व्यापक होगा और उसमें सभी प्रासंगिक मामले शामिल होंगे। जांच के दौरान कमेटी तथ्यों व फॉरेंसिक/ई-मेल समेत सभी जरूरी पहलुओं पर पड़ताल कर सकेगी। इसके साथ ही मामले में सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा सकेंगे।

बोर्ड की बैठक में जांच से संबंधित अन्य पहलुओं, जैसे स्वतंत्र व भरोसेमंद व्यक्ति को जांच कमेटी का प्रमुख बनाना, जांच की शर्तें व दायरा तय करना, जांच में लगने वाला वक्त आदि निर्धारित करने व कानूनी व पेशेवर सहायता प्रदान करने पर फैसला करने का अधिकार बैंक की ऑडिट कमेटी को दिया गया है।

बैंक के अनुसार गुमनाम शिकायतकर्ता के आरोप चुनिंदा कर्जदारों से बैंकिंग कामकाज के दौरान कोचर की भूमिका और हितों के टकराव से संबंधित हैं। शिकायत में कहा गया है कि कोचर का व्यवहार बैंक की आचार संहिता के अनुकूल नहीं रहा।

सेबी ने मांगा था जवाब-

बैंक ने 25 मई को बताया था कि सेबी ने बैंक और उसकी एमडी व सीईओ चंदा कोचर से शेयर बाजारों से किए गए पूर्ववर्ती सूचीबद्धता एग्रीमेंट और सूचीबद्धता व उद्घोषणा नियमन–2015 का पालन नहीं करने पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बीएसई को बैंक ने 24 मई को बताया था कि सेबी ने यह जानकारी मांगी है। सेबी का यह नोटिस बैंक व वीडियोकॉन समूह तथा वीडियोकॉन समूह व न्यूपावर के बीच हुए चुनिंदा लेन-देन को लेकर था। उस वक्त बैंक ने कहा था कि वह उचित समय पर इस बारे में जवाब देगा।

हितों के टकराव का है आरोप-

कोचर पर आरोप है कि उन्होंने वीडियोकॉन ग्रुप को बैंक से कर्ज हासिल करने में मदद की, जिसके बदले ग्रुप ने उनके पति दीपक कोचर द्वारा संचालित कंपनी न्यूपावर रिन्युएबल्स में पूंजी निवेश किया। आरोप यह भी है कि एस्सार ग्रुप के सह संस्थापक रवि रुइया के दामाद निशांत कनोडिया द्वारा संचालित एक कंपनी ने न्यूपावर में दिसंबर, 2010 में 325 करोड़ रुपये का निवेश किया।

संयोगवश उसी महीने एस्सार स्टील मिनेसोटा एलएलसी को आइसीआइसीआइ बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने 53 करोड़ डॉलर (डॉलर के तात्कालिक भाव के हिसाब से करीब 2,400 करोड़ रुपये) का कर्ज दिया। यह कर्ज बाद में फंसे कर्ज में बदल दिया गया।

गौरतलब है कि कोचर ने सात मई को कहा था कि बैंक पूरी तरह से नियमों का पालन कर रही है और नियामक व अन्य एजेंसियों को जांच में पूरा सहयोग कर रही है। उनसे पहले 29 मार्च को आइसीआइसीआइ बैंक के चेयरमैन एम. के. शर्मा ने कहा था कि कोचर के खिलाफ भाई-भतीजावाद के आरोप आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं।

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