नई दिल्ली: खुदरा कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने फ्लिपकार्ट-वालमार्ट के प्रस्तावित 12 अरब डॉलर के विलय सौदे की जांच की मांग की है. उसने कहा कि इससे ई-कॉमर्स क्षेत्र में बाजार बिगाड़ने वाले मनमाने तरीके से दाम तय करने की प्रवृति को बढ़ावा मिलेगा. कैट ने कहा, ‘‘यह वाकई में दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्पष्ट प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति होने के बाद भी चाहे खुदरा हो या फिर ई-कामर्स क्षेत्र, विदेशी कंपनियां बचने का रास्ता ढूंढ रहीं हैं.’’

संगठन ने फ्लिपकार्ट-वालमार्ट सौदे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार से ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिये नियामकीय प्राधिकरण गठित करने की मांग की. उसने कहा कि जब तक क्षेत्र के लिये नियामकीय प्राधिकरण गठित नहीं हो जाता है, इस तरह के सौदे को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए.

यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब वालमार्ट 12 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट की बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने के करीब पहुंच गयी है जबकि अमेजन भी इस सौदे को अपने पक्ष में करने की जुगत में है.

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 कैट ने कहा, ‘‘इस सौदे को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि इससे ई-कामर्स क्षेत्र में लागत से भी कम दाम पर कारोबार करने और बाजार बिगाड़ने वाले मनमाने तरीके से कीमत तय करने को बढ़ावा मिलेगा जो पहले ही गलत व्यापारिक तरीकों की जकड़ में है.’’
आरोप लगाया कि एफडीआई के जरिये खुदरा क्षेत्र में घुसने में असफल रहने के बाद वालमार्ट ने ई-कॉमर्स का रास्ता चुना है जो देश के व्यापारिक समुदाय के लिए काफी नुकसानदेह साबित होगा.