चीन ने मंगलवार को गुलाम कश्मीर में स्थित गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के हालिया फैसले को लेकर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। उसने सिर्फ इतना कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। इसका दोनों देशों को हल निकालना चाहिए। इस विवादित क्षेत्र से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की वजह से इस मसले पर उसका रुख प्रभावित नहीं होगा।

पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने गत 21 मई को एक आदेश जारी कर इलाके की स्थानीय परिषद के अहम अधिकारों को खत्म कर दिया है। इस आदेश को गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। उसके इस कदम पर भारत ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने कहा है, “गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा और भारत का अभिन्न अंग है।

इस हिस्से पर पाकिस्तान ने 1947 में आक्रमण कर कब्जा कर लिया था। इसलिए उसे इलाके की स्थिति में बदलाव का कानूनी अधिकार नहीं है। पाकिस्तान इस इलाके से अपना अवैध कब्जा खत्म कर उसे भारत के हवाले करे।” पाकिस्तान सरकार के हालिया कदम के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने कहा, “कश्मीर मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का है। दोनों देशों को बातचीत के जरिये इसका समाधान निकालना चाहिए। 50 अरब डॉलर की लागत वाली सीपीईसी परियोजना गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से गुजरेगी। इसके चलते कश्मीर पर चीन के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”

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