देश के सरकारी बैंकों के 25 फीसदी ATM धोखाधड़ी के आसानी से शिकार हो सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने माना है कि आउटडेटेड सॉफ्टवेयर के चलते ये ATM सुरक्षित नहीं हैं. यह बात संसद में पूछे गए सरकारी बैंकों से संबंधित एक सवाल के जवाब में सामने आई है. सरकार की तरफ से कहा गया कि सिक्यॉरिटी फीचर की कमी की वजह से ATM फ्रॉड की संभावना रहती है. बता दें कि सरकार ने प्राइवेट बैंकों द्वारा संचालित ATM के बारे में कोई जवाब नहीं दिया.

सॉफ्टवेयर अपडेट का दिया आदेश


बिजनेस न्यूजपेपर इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, सरकार ने संसद में निजी बैंकों के बढ़ते दखल के बावजूद वर्तमान में 70 फीसदी लेनदेन सरकारी बैंकों से होता है. हाल के कुछ महीनों में ग्राहकों ने एटीएम फ्रॉड के बारे में शिकायत की है. इसके बाद आरबीआई ने एडवाइजरी जारी करते हुए बैंकों से निश्चित समय के भीतर सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए कहा है.

आंकड़ों पर एक नजर


बैंकों का कहना है कि इस समय सीमा के भीतर इतने ATM के सॉफ्टवेयर अपडेट करना मुश्किल होगा. सरकार ने संसद में कहा कि जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से जुड़ी 25,000 शिकायतें मिली हैं. लेकिन कुल लेनदेन की संख्या 861 करोड़ रही जिसके मुकाबले शिकायतें काफी कम हैं.

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