मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन उत्पीड़न की शिकार हुई 30 लड़कियां मानसिक तौर पर बुरी तरह बीमार पाई गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि इनमें से कुछ ने आत्महत्या और खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है. पटना के दो प्रमुख अस्पतालों नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल और कोईलवर स्थित मानसिक अस्पताल के डॉक्टरों ने बलात्कार और शारीरिक यातना की शिकार हुई बच्चियों का इलाज करने की कोशिश की लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. अब यूनिसेफ की मदद से हैदराबाद स्थित एनफोल्ड इंडिया और एम्स के डॉक्टरों की एक टीम आज यानी सोमवार को ही पटना पहुंची है जो पीड़ित लड़कियों का इलाज करेगी.

इससे पहले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ऑडिट रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न का सनसनीखेज खुलासा होने के बाद 31 मई को ही मुजफ्फरपुर बालिका गृह की 42 बच्चियों को पटना और मधुबनी भेज दिया गया था. पिछले हफ्ते मेडिकल रिपोर्ट से 24 लड़कियों के साथ रेप की पुष्टि हुई है जिनमें एक सात साल की बच्ची भी शामिल है.

बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के निदेशक राज कुमार ने बताया कि जो लड़कियां पटना आईं उन्होंने एक हफ्ते बाद ही अजीब व्यवहार करना शुरू कर दिया. एनएमसीएच के डॉक्टर संतोष कुमार ने इनका इलाज करने की कोशिश की लेकिन खास फायदा नहीं हुआ. इसी बीच मधुबनी में रखी गई लड़कियों का व्यवहार भी चिंता पैदा करने वाला था. राज कुमार ने बताया कि इसके बाद यौन उत्पीड़न और यातना की शिकार हुईं 30 लड़कियों को रविवार को मोकामा के नाजरथ अस्पताल और आश्रय़ स्थल में शिफ्ट किया गया है जहां एम्स और एनफोल्ड की एक्सपर्ट टीम उनका इलाज करेगी.

उन्होंने कहा, “हमें इन लड़कियों के शरीर पर इंजेक्शन के घाव मिले. शारीरिक संबंध बनाने से पहले हर दिन ड्रग डोज दिया जाता था. अब इनका स्वभाव उग्र हो गया है. ये कभी ग्रिल में सिर टकराने की कोशिश करती हैं तो कभी आस-पास रखे किसी सामान को तोड़ने की कोशिश करती हैं.” पटना में इनका इलाज करने वाले डॉक्टर संतोष कुमार ने बातचती में गोपनीयता का हवाला देते हुए विस्तार से कुछ भी बताने से इनकार कर दिया पर इतना जरूर कहा कि ‘इन लड़कियों को तुरंत मदद की जरूरत है.’

यूनीसेफ के सुनील झा ने रेप पीड़िताओं के साथ मोकामा में कुछ वक्त बिताया. उन्होंने कहा कि कुछ लड़कियों में सुसाइड का रुझान पाया गया, इसलिए इनकी देख रेख पर खास ध्यान दिया जा रहा है. वहीं राज कुमार ने कहा कि पूरे मामले में अदालत में सुनवाई शुरु होने वाली है और इस दौरान पीड़िताओं का बयान अहम मयाने रखेगा. उन्होंने कहा, “इस जघन्य कांड के दोषियों को सजा दिलाना सरकार की प्राथमिकता है. इसके लिए जरूरी है कि पीड़ित लड़कियां सामान्य हो जाएं और कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लें. हम इनके स्वास्थ्य के प्रति संजीदा हैं.”

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