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Archives for सम्पादकीय

बेसुरों को बेस्ट मीडिया सिंगर का अवार्ड

  नकली लबादा ओढ़े हुए लोग इस देश को किस गर्क  में लेकर जाएंगे यह तो बस ईश्वर ही जानता है, क्योंकि इस देश के हालात कुछ ऐसे बन चुके…
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उच्च न्यायालयों में स्थानीय न्यायाधीशों की नियुक्ति बंद होना चाहिए

देश के समस्त राज्यों में जहां जहां भी उच्च न्यायालय है, वहां वहां स्थानीय न्यायाधीशों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि  इससे न्यायायिक व्यवस्था बहुत से अवसरों व फैसलों…
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सम्पादकीय

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा खुलेआम खेला जा रहा सट्टा

कल तक जो पब्लिक सेक्टर के बैंको के शेयर कोई भी खरीदने को तैयार नहीं था आज उनके भाव 25 से 45 फीसदी तक एक ही दिन में बढ़ गए.…
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सम्पादकीय

एक सुझाव इंदौर के प्रशासनिक अधिकारियों को

विगत दिनों लेखक ने इंदौर के एक सांध्य दैनिक में खबर पढ़ी जिसमें इंदौर के जिलाधीश निशांत वरवड़े ने इंदौर के एस डी एम सेंट्रल कोतवाली अजीत श्रीवास्तव के बारे…
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सम्पादकीय

मध्य प्रदेश के खदान माफियाओं की खुलेआम गुंडागर्दी।

माफियाओं में नाम तो बिहार का बदनाम था और विशेषकर लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में लेकिन आजकल भाजपा शासित मध्यप्रदेश में भी बिहार जैसे माफिया खुलेआम अपनी गुंडागर्दी करने…
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सम्पादकीय

स्वच्छ भारत अभियान: इन्दौर के मूत्रालय बीमारियों के घर

स्वच्छ भारत अभियान के तहत् प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिये इन्दौर नगर निगम ने ताबडतोड़ मूत्रालय एवं शौचालय शहर में बना दिये. जब तक इन्दौर देश में प्रथम स्थान…
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सम्पादकीय

प्रधानमंत्री जी देश की जनता को आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी.

जो काम सोनिया गांधी ने प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बना कर किया था वह काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करके कर दिया…
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सम्पादकीय

जीएसटी को लेकर पूरा देश असमंजस के दौर में

देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री क्या बना दिया, पूरा राष्ट्र असमंजस की स्थिति में आकर खड़ा हो गया है. न खाऊंगा न खाने दूंगा – यह कथन…
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सम्पादकीय

क्यों न मतदान के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित हो.

माना कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है लेकिन इस लोकतांत्रिक प्रणाली में सबसे बड़ा दोष यह है कि यहां पर प्रत्येक नागरिक को वोट का अधिकार प्राप्त…
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सम्पादकीय

भारतीय रेलवे के पास अकूत संपत्ति कबाड़ के रूप में विद्यमान

भारतीय रेल विश्व में किसी भी विकसित देश से कमजोर नहीं पड़ती. आज की स्थिति यह है कि भारतीय रेलवे के पास खरबों रुपयों की अकूत संपत्ति मात्र कबाड़ के…
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